बुद्ध जयन्ती की सभी देश वासियों को बधाई एवं शुभकामनायें

vijay jadav
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बौद्ध दर्शन का एक सूत्र वाक्य है- ‘अप्प दीपो भव’  अर्थात अपना प्रकाश स्वयं बनो। तथागत सिद्धार्थ गौतम बुद्ध के कहने का मतलब यह है कि किसी दूसरे से उम्मीद लगाने की बजाये अपना प्रकाश (प्रेरणा) खुद बनो। खुद तो प्रकाशित हों ही, लेकिन दूसरों के लिए भी एक प्रकाश स्तंभ की तरह जगमगाते रहो।religion-2689453_960_720

गौतम बुद्ध ने अपने प्रिय शिष्य आनन्द से उसके यह पूछने पर कि जब सत्य का मार्ग दिखाने के लिए आप या कोई आप जैसा पृथ्वी पर नहीं होगा तब हम कैसे अपने जीवन को दिशा दे सकेंगे? तो बुद्ध ने ये जवाब दिया था – “अप्प दीपो भव” अर्थात अपना दीपक स्वयं बनो ।

कोई भी किसी के पथ के लिए सदैव मार्ग प्रशस्त नहीं कर सकता केवल आत्मज्ञान के प्रकाश से ही हम सत्य के मार्ग पर आगे बढ़ सकते हैं। गौतम बुद्ध ने कहा, तुम मुझे अपनी बैसाखी मत बनाना। तुम अगर लंगड़े हो, और मेरी बैसाखी के सहारे चल लिए-कितनी दूर चलोगे?मंजिल तक न पहुंच पाओगे। आज मैं साथ हूं, कल मैं साथ न रहूंगा, फिर तुम्हें अपने ही पैरों पर चलना है। मेरी साथ की रोशनी से मत चलना क्योंकि थोड़ी देर को संग-साथ हो गया है अंधेरे जंगल में। तुम मेरी रोशनी में थोड़ी देर रोशन हो लोगे; फिर हमारे रास्ते अलग हो जाएंगे। मेरी रोशनी मेरे साथ होगी, तुम्हारा अंधेरा तुम्हारे साथ होगा। अपनी रोशनी पैदा करो। अप्प दीपो भव! – अप्प दीपो भव : जिसने देखा, उसने जाना । जिसने जाना, वो पा गया । जिसने पाया, वो बदल गया, अगर नहीं बदला तो समझो कि उसके जानने में ही कोई खोट था ।

तथागत बुद्ध को जाना तो बुद्दत्व तक पहुचेंगे तुम

नहीं तुम भगवान बुद्ध की पूजा करने से नहीं पहुचोगे न ही किसी अन्य की पूजा करने से या चेला बनने से|तुम खुद जानोगे तभी तुम पहुचोगे।

गौतम बुद्ध ने इश्वर पर निर्भर न रहकर अपने मार्ग और भला खुद ही करने की शिक्षा दी है| तथागत बुद्ध के अनुसार धर्म का अर्थ ईश्वर , आत्मा, स्वर्ग , नर्क , परलोक नही होता ? बुद्ध ने वैज्ञानिक तरीके से ईश्वर , आत्मा , स्वर्ग , नर्क , परलोक , के अस्तित्व को ही नकारा और ध्वस्त किया है | संसार भर के इतिहास में तथागत बुद्ध एक मात्र ऐसे धम्म प्रचारक है जो व्यक्ति को तर्क और विज्ञान के विपरीत किसी भी बात में विश्वास करने से रोकते है |

बुद्ध कहते है , जिसे ईश्वर कहते है उससे मेरा कोई लेना -देना (सम्बन्ध ) नही है ? किसी बात को केवल इसलिए स्वीकार मत करो क्यो कि मैंने इसे करने को कहा है I इसलिये भी मत स्वीकार करो कि किसी धर्म ग्रन्थ में लिखा है। इसलिए भी स्वीकार मत करो कि ये प्राचीन परम्परा है। किसी भी बात को मानने से पहले अपनी तर्कबुद्धि से परखो अगर उचित है तो उसका अनुकरण करो नही तो त्याग दो |

तथागत बुद्ध के जैसे स्वतंत्रता किसी भी अन्य धर्म ने नही दी  है |

 

बुद्ध ने स्वयं को मार्ग दर्शक कहा है और कभी भी विशेष दर्जा नही दिया | अप्प् दीपो भव्

vijay jadavविजय जाधव

9723742374

 

Sharuaat

સેંકડો યુવાનો છે જે ખરેખર પરિવર્તનનું કામ કરી રહ્યા છે અથવા તો આ વ્યવસ્થાને બદલવા રસ્તો શોધી રહ્યા છે. આવા યુવાદીપકો થકી બીજા યુવાઓને જગાડવા છે, ભ્રષ્ટ વ્યવસ્થા સામે લડતા કરવા છે. સાથે સાથે જે યુવાનોને યોગ્ય પ્લેટફોર્મ નથી મળી રહ્યું તેમને પણ મદદ કરવી એવો અમારો આશય છે. રાજકીય, સામાજિક, કળા, સાહિત્ય, IT, સોસીઅલ મીડિયા, વિજ્ઞાન, સંશોધન, વિગેરે એમ દરેક ક્ષેત્રમાં, યુવાનો માટે જે અગણિત સંભાવનાઓ છુપાયેલી છે, એ તેમને આ મેગેઝીનના માધ્યમથી તેમના હાથની હથેળી સુધી પહોંચાડવી છે. આ આર્ટીકલ વિષે તમારા પ્રતિભાવો કોમેન્ટમાં જરૂરથી લખજો. જય ભારત યુવા ભારત યુવાશક્તિ ઝીંદાબાદ કૌશિક પરમાર સંપાદક ૮૧૪૧૧૯૧૩૧૧

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